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| आशीष जीवन की अनुभूतियाँ, हों जिसकी जागीरा उसकी गजलें आंकती, बस सच्ची तस्वीरा आखर-आखर बोलता, अपने मन की बात, सदियों पहले कह गये, जैसे संत कबीर एक-एक कर कह गये, अनुभव कई हजार। वाह-वाह करते सभी, सुनकर सौ-सौ बार। फिक्र सुखन की जो करे, जीवन में दिन-रात, भूल न पायेगा उसे, ग़ज़लों का संसारा - डॉ० मधुसूदन साहा शुभकामनाएँ हर जगह सायबान बन जाना सबसे ऊँचा मकान बन जाना इतनी चाहत है सुन मेरे भाई हर किसी का बयान बन जाना ब्रिक्र गजलों का जब करे कोई तुम वहाँ आसमान बन जाना - अनिरुद्ध सिन्हा कृष्ण कुमार प्रजापति उपनाम: 'कुमार प्रजापति 65 वर्ष, राउरकेला शिक्षा: लेखन विधाएं: एम.ए. (हिंदी), एल. एल. बी. पी.एच.डी कहानी कविता लघुका प्रकाशित कृतियाँ: कविता संकलन: 1. हरी बसिरी के स्वर 2. आज का एक कहानी-संग्रह: गजल संग्रह: 1. देश में निकला होगा चाँद 2. उबाले की तलाश 1. सोच की तीलियाँ 2. सन्नाटे कर शोर 3. साधान 4. आइना मूँगा नाहीं 5 बयालो का सहर भावनाओं की बस्तियों सजल समग्र विवेचना संपादकः 7. संवेदनाओं के इंद्रधनुष ४.हिकका बेला दो खण्ड। त्रिक की सोडिया 2. फिश-ए-तमाम 1. कृष्ण कुमार प्रजापति की गजले एक अनुशीलन 1. हिन्ती कहानी के विविध आंदोलन 1. शब्द-शिल्प के साधक डॉ. मधुसूदन साहा अभिनय) 2. जरूर सिद्दीकी की चुनिंदा राजरों 3. प्यास का लश्कर 4. बीरा जलगो दो सी गव्रले 5. तीस सजलगो: तीन सी गाजले संपादन सहयोगः 1. साधना के सभी (कविता संकलन) 2. शिखर की खोज (कविता संकलन) 3. शिखा के सात स्वर (कविता संकलन) 4. तीस लगो तीन सी राजले उर्दू अनुवादः उड़िया अनुवादः पता: 1. बागबान 2. सोच की तीलियाँ 3 उजालों के उरीचे 1. आज का एकलव्य प्रजापति भवन, मेन रोड, रागारकेला 769001 (ओडिशा) 2. होटल शुभम, शुभम लेन, रेलवे स्टेशन के सामने राउरकेला - 769001 (ओडिशा) |
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