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1883-1931 कवि, चित्रकार एवं दार्शनिक खलील जिब्रान का जन्म लेबनान के उस भू-भाग में हुआ, जहाँ बहुत से संत पुरुषों ने जन्म लिया। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनकी लेखनी में जहाँ एक ओर मानव-हृदय की गहनतम भावनाओं को मूर्तरूप देने की क्षमता है, वहीं जीवन को उत्कृष्टतम बनाने की दार्शनिक क्षमता भी है। उनकी ख्याति अरबी क्षेत्र में ही सीमित नहीं रही वरन् संपूर्ण विश्व में फैली। उनके साहित्य को 20 से अधिक भाषाओं में रूपांतरित किया जा चुका है तथा उनके बनाए चित्रों की प्रदर्शनियाँ विश्वभर में लगायी जाती रही हैं। अपने जीवन के अंतिम 20 वर्ष वे अमेरिका में रहे तथा अंग्रेजी भाषा में भी लिखा। उनके विचारों में कई स्थानों पर वेदांत दर्शन की झलक भी मिलती है। प्रस्तुत पुस्तक में उनकी दो पुस्तकों के रूपांतर का प्रयास किया गया है।
खलील जिब्रान में अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की अद्भुत प्रतिभा थी। उन्होंने अपने विचारों, कल्पनाओं और अनुभूतियों को देवदूत नामक पुस्तक में बड़ी निपुणता के साथ व्यक्त किया है। इस पुस्तक का विषय मानव का मानव के साथ संबंध और मानव का प्रकृति के साथ संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है। इस पुस्तक में सामाजिक संबंधों, व्यवहारों, समस्याओं और उनकी अनुभूतियों को रेखांकित किया गया है। इस पुस्तक में प्रेम, शादी, बच्चे, खाना-पीना, कार्य, सुख-दुःख, मकान, वस्त्र, क्रय-विक्रय, अपराध, दंड, कानून, स्वतंत्रता, तर्क, भावुकता, दर्द, आत्मज्ञान इत्यादि विषयों को पाठक के सामने रोचकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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